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नास्तिकों के कुतर्क एवं इन से उपजा व्यर्थ का अपराधबोध

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धर्म एवं पाखंड: द्वितीय खंड नास्तिकों के कुतर्क एवं एवम उन से उपजा व्यर्थ​ का अपराधबोध:- नमस्कार मित्रों मेरे ब्लॉग पर आप सभी का पुनः स्वागत है। जैसा कि शीर्षक से ही मालूम पड़ता है आज हम बात करेंगे नास्तिकों की और उनके द्वारा किए गए कुतर्कों का अन्वेषण करेंगे। नास्तिक से अभिप्राय मेरा उन व्यक्तियों के लिए है जो ईश्वर अथवा अथवा वेद दोनों की ही सत्ता को अस्वीकार करते हैं और दोनों के अस्तित्व पर और उनकी शिक्षाओं पर लगातार व्यर्थ के प्रश्न और कुतर्क करके उनको अपमानित करने का प्रयत्न करते रहते हैं जैसा कि हमेशा होता आया है जो भगवत भक्त या आस्तिक व्यक्ति यह सोच कर कि लगता है इनको वह शिक्षाएं समझ में नहीं आती या इन्हें कुछ भ्रम हो गया है ऐसा मानकर उन को समझाने का या उनसे तर्क कर के अपना पक्ष सिद्ध करने का प्रयत्न करेगा तो  यह लोग उसको कुतर्क के माध्यम से चुप करा कर अपनी विजय करते हैं और ईश्वर को और वेद को अपमानित करते हैं आस्तिक व्यक्ति कुतर्क नहीं कर सकता क्योंकि वह जानता है अगर वह कुतर्क करेगा तो वह धर्म की हानि ही करेगा और उसकी इसी विवशता का नास्तिक सदैव लाभ उठाते हैं। तर...

धर्म एवं पाखंड प्रथम खंड

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                             धर्म एवं पाखंड sudhanshu shekhar tripathi Public Mar 5, 5:36 AM  नमस्कार मित्रों आज मेरा ब्लॉग पर पहला दिन है और ब्लॉग लिखने की मेरी इच्छा बहुत पहले से थी परंतु हमेशा इस असमंजस में रहता था की किस विषय पर बात करूं और बहुत सोच विचार करके मुझे धर्म एक ऐसा विषय लगा जिस पर बात करना और लिखना पढ़ना आवश्यक है क्योंकि वर्तमान समय में इंटरनेट पर सनातन धर्म के संदर्भ में जितनी भी बातें होती है कम से कम जो मैंने देखी वह अधकचरा पढ़ाई और सुनी-सुनाई होती है धर्म का विषय बहुत सूक्ष्म होता है कोई भी ऐसे ही अपने मन से धर्म के सिद्धांत नहीं बना सकता या बदल सकता है उसके लिए धर्म का सटीक अध्ययन अत्यंत आवश्यक है अतः मैंने यह प्रयास करने का निश्चय किया है जितना हो सकेगा मैं धर्म के नाम पर फैली कुरीतियों और अंधविश्वासों से ऊपर उठकर शाश्वत धर्म क्या है जो विलुप्त हो रहा है उसकी बात करूंगा सबसे पहले मैं धर्म और पाखंड के बीच जो अंतर है उस पर बात करूंगा क्योंकि कई पुराणों में ...