नास्तिकों के कुतर्क एवं इन से उपजा व्यर्थ का अपराधबोध
धर्म एवं पाखंड: द्वितीय खंड नास्तिकों के कुतर्क एवं एवम उन से उपजा व्यर्थ का अपराधबोध:- नमस्कार मित्रों मेरे ब्लॉग पर आप सभी का पुनः स्वागत है। जैसा कि शीर्षक से ही मालूम पड़ता है आज हम बात करेंगे नास्तिकों की और उनके द्वारा किए गए कुतर्कों का अन्वेषण करेंगे। नास्तिक से अभिप्राय मेरा उन व्यक्तियों के लिए है जो ईश्वर अथवा अथवा वेद दोनों की ही सत्ता को अस्वीकार करते हैं और दोनों के अस्तित्व पर और उनकी शिक्षाओं पर लगातार व्यर्थ के प्रश्न और कुतर्क करके उनको अपमानित करने का प्रयत्न करते रहते हैं जैसा कि हमेशा होता आया है जो भगवत भक्त या आस्तिक व्यक्ति यह सोच कर कि लगता है इनको वह शिक्षाएं समझ में नहीं आती या इन्हें कुछ भ्रम हो गया है ऐसा मानकर उन को समझाने का या उनसे तर्क कर के अपना पक्ष सिद्ध करने का प्रयत्न करेगा तो यह लोग उसको कुतर्क के माध्यम से चुप करा कर अपनी विजय करते हैं और ईश्वर को और वेद को अपमानित करते हैं आस्तिक व्यक्ति कुतर्क नहीं कर सकता क्योंकि वह जानता है अगर वह कुतर्क करेगा तो वह धर्म की हानि ही करेगा और उसकी इसी विवशता का नास्तिक सदैव लाभ उठाते हैं। तर...